राष्ट्रीय न्यास

राष्ट्रीय न्यास स्वपरायणता, प्रमस्तिष्कघात, मानसिक मंदता और बहु-विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के कल्याण के लिए

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समर्थ
(राहतकारी देखभाल)

योजना को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

समर्थ योजना के न्यूनतम मानक

नामांकन के लिए यहां क्लिक करें

योजना संबन्धित जानकारी

  1. समर्थ योजना का उद्देश्य अनाथों अथवा लावारिसों, संकटग्रस्त परिवारों और बीपीएल तथा एलआईजी परिवारों से आनेवाले विकलांगता-युक्त व्यक्तियों को और ऐसे निराश्रितों को राहतकारी देख-भाल उपलब्ध कराना है।
  2. दिव्यांगजनों के परिवार के सदस्यों के लिए ऐसे अवसर पैदा करना है कि वे अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए राहतकारी समय पा सकें
  3. सभी आयु समूहों के लिए ऐसी सामूहिक गृह सेवा प्रदान की जानी चाहिए, जिसमें देख-भाल की पर्याप्त एवं उत्तम सेवाओं से युक्त स्वीकार्य जीवन-स्तर की सुविधाओं के साथ-साथ प्रोफेशनल डॉक्टर की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध हो।
  4. 30 दिव्यांगजनों का एक बैच
  5. पंजीकृत संस्था को एलआईजी और एलआईजी से ऊपर के दिव्यांगजनों के लिए 1:1 का अनुपात बनाना आवश्यक।
  6. यह योजना जम्मू कश्मीर के अलावा पूरे देश में उपलब्ध है।

योजना का विवरण

इस योजना का उद्देश्य समर्थ केन्द्रों की स्थापना करना है, ताकि विनिर्दिष्ट श्रेणी के विकलांगता-युक्त व्यक्तियों को राहत और आश्रय के साथ देख-भाल की सुविधा दी जा सके। समर्थ केन्द्र में कम से कम निम्नलिखित सुविधाएं अवश्य होनी चाहिएः

I. सामूहिक गृह

पंजीकृत संस्था द्वारा सभी आयु समूहों के लिए ऐसी सामूहिक गृह सेवा प्रदान की जानी चाहिए, जिसमें देख-भाल की पर्याप्त एवं उत्तम सेवाओं से युक्त स्वीकार्य जीवन-स्तर की सुविधाओं के साथ-साथ प्रोफेशनल डॉक्टर की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध हो। समर्थ केन्द्र की क्षमता 30 की है, जिसमें गैर एलआईजी और गैर बीपीएल भी शामिल हैं।

समर्थ केन्द्र के किसी एक बैच में 30 दिव्यांगजन हो सकते हैं। अधिकतम 30% अतिरिक्त दिव्यांगजनों को रखने की अनुमति है। इस प्रकार समर्थ केन्द्र में बैच का आकार 39 का हो सकता है। 39 दिव्यांगजनोंं की अधिकतम संख्या पर पहुँचने के उपरान्त समर्थ केन्द्र किसी और दिव्यांगजन को केन्द्र में नामांकन की अनुमति नहीं देगा। यदि नए समर्थ केन्द्र के लिए पर्याप्त संख्या में दिव्यांगजन हों तो पंजीकृत संस्थाओं को दुबारा आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

पंजीकृत संस्था को एलआईजी (बीपीएल सहित) और एलआईजी से ऊपर के दिव्यांगों (जो पंजीकृत संस्था के लिए सशुल्क सीटें होंगी) के लिए 1:1 का अनुपात बनाए रखना चाहिए। एलआईजी से ऊपर की सीटों के लिए पंजीकृत संगठन माता-पिता, अभिभावकों, परिवार के सदस्यों, पंजी.कृत संगठन अथवा अन्य किसी संस्था/व्यक्ति से सीधे भुगतान ले सकते हैं, जिसके निबंधन व शर्तें पंजीकृत संस्था और अन्य संबंधित पक्षकार (माता-पिता, अभिभावक, परिवार के सदस्य, पंजीकृत संस्था अथवा कोई अन्य संस्था/व्यक्ति) के मध्य आपसी सहमति से निर्धारित की जा सकती हैं।

जैसाकि इस प्रलेख में पहले कहा गया है, यह ध्यान देने योग्य है कि पंजीकृत संस्था को और अधिक दिव्यांगजनों को समर्थ केन्द्र में लाना चाहिए जो या तो गैर-एलआईजी हों या उपर्युक्त श्रेणी में शामिल न हों। इससे स्थिरता सुनिश्चित होगी।

स्टाफिंग

  1. केन्द्र में दिव्यांगजनों के लिए कम से कम 2 विशेष शिक्षकों (+रोजगारपरक प्रशिक्षकों) की व्यवस्था;
  2. फीजियोथेरेपिस्ट अथवा ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट
  3. 3 देख-भालकर्ता; तथा
  4. 2 आया
  5. 1 रसोइया की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्टाफिंग

समर्थ केन्द्र में रोजगारपरक प्रशिक्षण देनेवाले कम से कम दो विशेष प्रशिक्षकों (रोजगारपरक प्रशिक्षकों), एक फीजियोथेरेपिस्ट अथवा ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट, तीन देखभाल करनेवालों, दो आया और एक रसोइए की व्यवस्था होनी चाहिए।

इन केन्द्रों में शारीरिक प्रशिक्षक और स्पीच थेरेपिस्ट की उपलब्धता भी वांछनीय है।

स्टाफ के संबंध में पालन की जानेवाली आवृत्ति अथवा समय-सारिणी निम्नवत हैः

क्रम सं. वर्ग स्टाफ की संख्या आवृत्ति अथवा प्रतिमाह अपेक्षित दौरों की न्यूनतम संख्या
I. विशेष शिक्षक (रोजगारपरक प्रशिक्षक) 2 प्रतिदिन
II. फीजियोथेरेपिस्ट अथवा ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट 1 सप्ताह में 5 बार
III. देखभाल करनेवाले 3 प्रतिदिन 2 पालियों में
IV. आया 2 प्रतिदिन
V रसोइया 1 प्रतिदिन

 

मूलभूत सुविधाए

  1. एक चिकित्सा/जाँच कक्ष (चिकित्सकीय सहायता और उपकरणों से सज्जित)
  2. एक गतिविधि कक्ष; या रोज़गार परक प्रशिक्षण कक्ष; तथा
  3. एक मनोरंजन कक्ष
  4. दिव्यांगजनों के लिए साफ-सुथरी आवास-व्यवस्था तथा अन्य सुविधाएं
  5. रसोई
  6. कार्यालय का काम करने के लिए कार्यालय संबन्धित सामान तथा पर्सनल कंप्यूटर की व्यवस्था भी शामिल है।

मूलभूत सुविधायों के संबंध में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

मूलभूत सुविधाएं

समर्थ केन्द्र में दिव्यांगजनों के लिए कम से कम एक चिकित्सा कक्ष अथवा जाँच कक्ष (चिकित्सकीय सहायता और उपकरणों से सज्जित), कम से कम एक गतिविधि कक्ष अथवा रोजगार-प्रशिक्षण कक्ष, कम से कम एक मनोरंजन कक्ष, साफ-सुथरी आवास-व्यवस्था तथा अन्य सुविधाएं अवश्य होनी चाहिए। सभी कक्ष समुचित आकार के हों।

साथ ही, समर्थ केन्द्र में एक रसोईघर और कार्यालय संबन्धित साजो-सामान की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इसमें कार्यालय का काम करने और योजना के अंतर्गत यथावश्यकता निधि हेतु अनुरोध भेजने, राष्ट्रीय न्यास से सूचना के आदान-प्रदान तथा रिपोर्टों व अन्य दस्तावेजों के प्रेषण के लिए पर्सनल कंप्यूटर की व्यवस्था भी शामिल है।

कार्य- केन्द्रों की स्थापना के लिए सहायता (केवल स्थापना लागत) राष्ट्रीय न्यास द्वारा प्रदान की जाएगी, जो प्रस्ताव की व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।

 

पात्रता मानदंड

टिप्पणी : जब तक पंजीकृत संस्था उपरलिखित मानदंडो को पूरा नहीं करती, तब तक योजना में निवेदन नहीं किया जा सकता

अन्य मानदंड

(i) पंजीकृत संस्थानों के लिए मानदंड

(ii) दिव्यांगजनों के लिए मानदंड

पंजीकृत संस्था के लिए पात्रता मानदंड

समर्थ योजना में नामांकन के लिए पंजीकृत संस्था को निम्नलिखित सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करना चाहिए

क्रम सं. पात्रता मानदंड अपेक्षित दस्तावेज
1 आवेदक राष्ट्रीय न्यास में पंजीकृत हो राष्ट्रीय न्यास का वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र
2 सामूहिक गृह की भूमि या तो पंजीकृत संस्था के स्वामित्व में हो या कम से कम 5 वर्ष की लीज पर हो, जिसमें नवीकरण का प्रावधान हो पते का प्रमाण स्वामित्व दस्तावेज या लीज डीड
3 आवेदक को ऐसे दिव्यांगजन के साथ काम करने का कम से कम 2 वर्ष का अनुभव हो, जिनमें राष्ट्रीय न्यास अधिनियम में विहित चार में से कम से कम एक विकलांगता का एक वर्ष का अनुभव हो पंजीकृत संस्था की घोषणा, जिसमें कार्यों का विवरण हो
4 योजना के लिए नामांकन के समय पंजीकृत संस्था को राष्ट्रीय न्यासध्किसी अन्य सरकारी संगठन द्वारा योजना के लिए ब्लैक-लिस्ट न किया गया हो पंजीकृत संस्था की घोषणा

(ii) दिव्यांगजनों के लिए पात्रता मानदंड

समर्थ केन्द्र में नामांकन के लिए लाभग्राही के पात्रता मानदंड नीचे दिए जा रहे हैं (चाहे दिव्यांगजन राष्ट्रीय न्यास से निधिकृत हो अथवा न हो)

क. दिव्यांगजन में राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अनुसार कोई विकलांगता होनी चाहिए, जैसे- ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मंद बुद्धि और एकाधिक विकलांगताएँ

ख. दिव्यांगजन को दिशा, विकास योजना अथवा घरौंदा योजना में नामांकित नहीं होना चाहिए।

घरौंदा केंद्र से लिंकेज

जो दिव्यांगजन समर्थ केंद्र में 5 साल तक रहता है और यदि उसकी आयु 18 वर्ष की हो गयी हो तो उस दिव्यांगजन को घरौंदा केंद्र में स्थानांतरित करने का प्रावधान है

 

पंजीकृत संस्था और दिव्यांगजनों की नामांकन प्रक्रिया

(i) पंजीकृत संस्थानों के लिए नामांकन प्रक्रिया

(ii) दिव्यांगजनों के लिए नामांकन प्रक्रिया

(i)पंजीकृत संस्था नामांकन (प्रथम अनुमोदन) प्रक्रिया

  1. समर्थ योजना का विधिवत आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भरें और अपेक्षित दस्तावेज* स्कैन करके अपलोड करें
  2. विधिवत आवेदन फॉर्म भरें तथा राष्ट्रीय न्यास के पोर्टल पर अपलोड करें
  3. रु. 1000 के आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन करें
  4. भरे हुए फॉर्म का प्रिंट आउट तथा तत्संबंधी दस्तावेज राष्ट्रीय न्यास को 7 दिन के भीतर प्रेषित करें ताकि यह राष्ट्रीय न्यास में 15 दिन के भीतर प्राप्त हो जाए।

 

पंजीकृत संस्थानों के लिए नामांकन प्रक्रिया

पंजीकृत संस्था नामांकन प्रक्रिया में उन सभी चरणों का उल्लेख है, जिनका पहली बार समर्थ केन्द्र के लिए नामांकन के समय पालन किया जाना है। साथ ही, इसमें विभिन्न गतिविधियों के संबंध में प्रत्येक चरण के लिए अपेक्षित सूचना एवं दस्तावेजों का यथावश्यक विवरण दिया गया है।

चरण 1. पंजीकृत संस्था राष्ट्रीय न्यास की वेबसाइट पर लॉग इन करती है।

चरण 2. आवेदन फॉर्म राष्ट्रीय न्यास की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध है। इसे ऑनलाइन ही प्रस्तुत किया जाना है। समर्थ योजना में नामांकन के लिए आवेदन शुल्क रु. 1000 है।

* ऑनलाइन आवेदन फॉर्म प्रस्तुत करने के चरण

  • समर्थ आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भरें और अपेक्षित दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें
  • विधिवत भरा हुआ फॉर्म राष्ट्रीय न्यास के पोर्टल पर प्रस्तुत करें
  • रु. 1000 के आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन करें
  • भरे हुए फॉर्म का प्रिंट आउट तथा तत्संबंधी दस्तावेज राष्ट्रीय न्यास को 7 दिन के भीतर प्रेषित करें ताकि यह राष्ट्रीय न्यास में 15 दिन के भीतर प्राप्त हो जाए।

नामांकन के उद्देश्य से पंजीकृत संस्थानों को निम्नलिखित दस्तावेज और सूचनाएं प्रस्तुत अथवा अपलोड करनी हैं

  1. पात्रता मानदंड पूरा करने संबंधी दस्तावेज
  2. पते का प्रमाण पंजीकृत संस्था का स्वत्व विलेख/स्वामित्व संबंधी प्रमाणपत्रध्लीज डीड अथवा किरायेदारी करार
  3. बैंक का ब्यौरा, जिसमें बैंक खाता संख्या, खाता-धारक का नाम, बैंक का नाम, शाखा का नाम और आईएफएससी कोड आदि उल्लिखित हो
  4. पीडब्ल्यूडी अधिनियम 1995 के अंतर्गत एनजीओ का पंजीकरण जारी किए जाने और पंजीकरण के समापन की तारीख
  5. वर्तमान स्थापना के बारे में पंजीकृत संस्था की घोषणा, जिसमें निम्नलिखित का समावेश हो :-
    • मौजूदा सुविधाएं एवं मूलभूत ढाँचा
    • वर्तमान में संचालित की जा रही सभी गतिविधिया
    • स्टाफ का विवरण, शैक्षिक योग्यता व अनुभव सहित
  6. प्रस्तावित योजना, जिसमें निम्नलिखित का उल्लेख हो
    • स्थापना अवधि के अंत (1महीना) में प्रस्तावित संसाधनों अथवा स्टाफिंग के विवरण - 2 विशेष शिक्षक (रोजगारपरक प्रशिक्षक), फिजियोथेरेपिस्ट अथवा ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट, देखभाल करनेवाले, आया, रसोइया एवं अन्य स्टाफ
    • स्थापना अवधि के अंत (1 महीना) तक संपन्न किए जानेवाले प्रस्तावित मूलभूत ढाँचे के विवरण, जैसे- गतिविधि कक्ष या रोजगारपरक प्रशिक्षण कक्ष, मनोरंजन कक्ष, चिकित्साकक्ष, साफ.सफाई आवास तथा अन्य सुविधायें, रसोईघर और कार्यालय संबन्धित साजो-सामान आदि
    • उपलब्ध अथवा प्रस्तावित दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल प्रावधानों (बाधा रहित परिसर, बाधा रहित शौचालय, फर्नीचर एवं फिक्स्चर) का विवरण
    • पंजीकृत संस्था का भौतिक सत्यापन फॉर्म तथा प्रस्तावित समर्थ केन्द्र साइट का डीसी, डीएम, समाज कल्याण अधिकारी, तहसीलदार किसी एक के कार्यालय, राष्ट्रीय न्यास के अधिकारियों द्वारा किया गया सत्यापन।

चरण 3. राष्ट्रीय न्यास को आवेदन फॉर्म तथा दस्तावेज मिलने पर उनकी जाँच की जाती है और उनका भौतिक सत्यापन किया जाता है। किन्तु यदि कोई सूचना न मिली हो या त्रुटिपूर्ण सूचना प्रस्तुत हुई हो और उसे पुनः प्रस्तुत किया जाना हो तो उसके पुनः प्रस्तुतीकरण के लिए पंजीकृत संस्था को राष्ट्रीय न्यास द्वारा सूचना दिए जाने से 15 दिन तक का समय दिया जाता है।

ध्यान दें कि पंजीकृत संस्था तथा प्रस्तावित समर्थ केन्द्र के भौतिक सत्यापन से संबंधित दस्तावेज या तो राष्ट्रीय न्यास की वेबसाइट पर योजना के लिए नामांकन के समय या ऑनलाइन आवेदन के प्रस्तुत किए जाने के बाद भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। यदि पंजीकृत संस्था उक्त दस्तावेजों को समय पर प्रस्तुत करने में विफल रहती है तो उसके प्रस्तुतीकरण के लिए पंजीकृत कार्यालय को राष्ट्रीय न्यास से अधिसूचना प्राप्त होने के पश्चात् 15 दिन का समय दिया जाएगा।

चरण 4. आवेदन अथवा प्रस्ताव पर अन्तिम निर्णय सभी आवश्यक औपचारिकताएं और प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद किया जाता है। भौतिक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर यदि पंजीकृत संस्था योजना के मानदंडों और अपेक्षाओं को पूरा करती है तो आवेदन को अनुमोदित कर दिया जाता है। यदि कोई विसंगति हो तो उससे पंजीकृत संस्था को अवगत करा दिया जाता है।

चरण 5. प्राप्ति बिन्दु से 15 दिन के भीतर राष्ट्रीय न्यास द्वारा पंजीकृत संस्था को सूचना प्रेषित की जाएगी। ऑनलाइन फॉर्म के मामले में, प्राप्ति बिन्दु वह तारीख व समय है, जब फॉर्म को सभी अपेक्षित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन प्रस्तुत किया गया। किन्तु यदि कोई दस्तावेज न मिला हो तो ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण की प्राप्ति के 10 दिन के भीतर राष्ट्रीय न्यास द्वारा पंजीकृत संस्था को सूचित किया जाएगा।

चरण 6. यदि पंजीकृत संस्था ने दस्तावेजों की हार्ड प्रति अभी नहीं भेजी है, तो राष्ट्रीय न्यास विनिर्धारित समय के 10 दिन के भीतर पंजीकृत संस्था को एक सूचना भेजेगा।

चरण 7. नामांकन पूरा होता है, पंजीकृत संस्था के लिए योजना आईडी निर्मित होती है और उसकी पुष्टि पंजीकृत संस्था को संप्रेषित की जाती है।

चरण 8. राष्ट्रीय न्यास द्वारा पंजीकृत संस्था को एक स्टार्टर की समर्थ हैंडबुक भी दी जाती है, जिसमें समर्थ योजना के पूरे विवरण दिए गए होते हैं।

चरण 9. पंजीकृत संस्था को स्थापना व्यय प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय न्यास निधि-संवितरण आरंभ करता है।

मौजूदा समर्थ केन्द्र को भी उसी प्रक्रिया का पालन करना होगा जो नई योजना के अंतर्गत नामांकन के लिए ऊपर वर्णित है। इसमें दस्तावेजों तथा प्रस्ताव का प्रस्तुतीकरण भी शामिल है। पंजीकृत संस्था को मौजूदा योजना के अंतर्गत लाभ का मिलना बन्द हो जाएगा और नई योजना के अंतर्गत निधियाँ मिलना आरंभ हो जाएंगी। समर्थ योजना के लिए नामांकन की प्रक्रिया वही है, जिसका वर्णन ऊपर किया गया है।

(ii)समर्थ केन्द्र में दिव्यांगजनों का नामांकन

चरण 1. दिव्यांगजन केन्द्र पर आता है अथवा लाया जाता है।

चरण 2. समर्थ केन्द्र किसी थेरैपिस्ट अथवा काउंसलर की मदद से दिव्यांगजनों का मूल्यांकन परीक्षण कराता है, ताकि दिव्यांगजनों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझा जा सके।

चरण 3. यदि दिव्यांगजन अनाथ अथवा लावारिस हो अथवा संकटग्रस्त परिवार से हो तो पंजीकृत संस्था को उसके प्रमाणन के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत सक्षम जिला अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। उपर्युक्त के प्रमाणन संबंधी दस्तावेज के अलावा, समर्थ केन्द्र में नामांकन के लिए और कोई भी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होती। साथ ही, दिव्यांगजन स्वतः ही बीपीएल श्रेणी में शामिल कर लिया जाता है। दिव्यांगजनों को समर्थ केन्द्र में पंजीकरण के साथ-साथ निरामय में भी नामांकित कर लिया जाता है।

चरण 4. अन्य सभी मामलों में यह जाँच की जाती है कि दिव्यांगजनों पर राष्ट्रीय न्यास द्वारा एलआईजी अथवा बीपीएल निधीयन लागू है या नहीं।

चरण 5. माता-पिता अथवा अभिभावकों से अपेक्षित है कि वे नामांकन फॉर्म भरें (और यदि आवेदन शुल्क हो तो वह भरें) तथा निम्नलिखित दस्तावेजों की मूल एवं फोटोकॉपियाँ जमा कराएँ। प्रत्येक दिव्यांगजन के दस्तावेजों और रिकॉर्डों को अलग-अलग फाइल में रखा जाना चाहिए।

समर्थ केन्द्र में नामांकन के लिए माता-पिता अथवा अभिभावक निम्नलिखित दस्तावेज लेकर आएँ

क) नामांकन फॉर्म

ख) दिव्यांगजन का जन्म प्रमाणपत्र अथवा जन्म-तिथि का प्रमाण

ग) विकलांगता प्रमाणपत्र

घ) माता-पिता अथवा अभिभावक का आय प्रमाणपत्र जो (एलआईजी अथवा बीपीएल परिवार के लिए) संबंधित राज्य/संघ शासित क्षेत्र द्वारा प्राधिकृत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया हो

ङ) माता-पिता अथवा अभिभावक का पहचान प्रमाण

च) यदि माता-पिता अभिभावक न हों तो कानूनी अभिभावकता प्रमाणपत्र अथवा कानूनी अभिभावकता प्रमाणपत्र, यदि दिव्यांगजन 18 वर्ष से अधिक आयु का हो और माता-पिता अभिभावक न हों।

नोट करें कि दिव्यांगजन के माता-पिता अथवा अभिभावक को फार्म में एक स्थान पर यह भी अनिवार्य रूप से भरना है कि दिव्यांगजन का कितनी अवधि तक रहने का इरादा है।

चरण 6. जमा कराए गए उपर्युक्त सभी दस्तावेजों का सफलतापूर्वक सत्यापन हो जाने की स्थिति में दिव्यांगजन का समर्थ केन्द्र में नामांकन हो जाता है- लाभग्राही माता-पिता अथवा अभिभावकों (यदि हों) को एक पुष्टिकरण नामांकन आईडी कार्ड रसीद और स्टार्टर किट दे दिया जाता है। साथ ही, आरंभ होने की तारीख, नियमों और विनियमों आदि के विवरण भी समर्थ प्रतिनिधि द्वारा बता दिए जाते हैं।

चरण 7. यदि लाभग्राही ने निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना की सुविधा अभी नहीं प्राप्त की है तो समर्थ के प्रतिनिधि लाभग्राही के माता-पिता और अभिभावकों को निरामय स्वास्थ्य बीमा के बारे में विस्तार से बताते हैं। पंजीकृत संस्था का प्रतिनिधि दिव्यांगजन के निरामय योजना के अंतर्गत पंजीकरण में मदद करता है। इसके लिए माता-पिता अथवा अभिभावकों की सहमति ली जाती है। यदि माता-पिता अथवा अभिभावक न हों तो समर्थ केन्द्र के लिए दिव्यांगजन को निरामय में नामांकित कराना अनिवार्य है।

निधि संवितरण प्रक्रिया

क्रम सं. निधीयन शीर्ष राशि (भारतीय रुपये में) निधि संवितरण की आवृत्ति
I. स्थापना लागत (गतिविधि कक्ष, मनोरंजन कक्ष, चिकित्सा कक्ष, कम्प्युटर, फर्नीचर, स्कैनर और इंटरनेट कनैक्शन की संस्थापनाद्ध) 2,90,000 /- एक बार
II. निर्वाह लागत 7,000- प्रतिपूर्ति प्रति अतिरिक्त दिव्यांग प्रति माह = समर्थ केंद्र में अपेक्षित अधिकतम दिव्यांगजन (30) उस महीने में समर्थ केंद्र में वास्तविक दिव्यांगजन, स्पष्ट किया जाता है कि प्रारंभिक महीनों में पंजीकृत संस्था द्वारा नामांकित दिव्यांगों की न्यूनतम संख्या 6 से कम नहीं होगी। मासिक, प्रारंभिक 3 महीनों के लिए
III. मासिक आवर्ती लागत 7,000- प्रति दिव्यांग प्रति माह मासिक
IV. कार्य-केन्द्र हेतु स्थापना लागत (यदि पंजीकृत संस्था ने लिया हो) 25,000-से 1,00,000- के बीच मामले के आधार पर

जैसाकि पहले बताया गया, समर्थ केन्द्र के लिए निधि संवितरण तीन श्रेणियों हेतु होगा। इस खंड में हमने सभी तीन श्रेणियों के लिए निधि-संवितरण की प्रक्रिया का वर्णन किया है।

कृपया नोट करें कि प्रत्येक पंजीकृत संस्था को समर्थ योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय न्यास से प्राप्त निधियों के लिए उपयुक्त खातों में अलग लेखा रखना चाहिए, जिसमें प्राप्त राशि, व्यय की गई राशि तथा हाथ में शेष राशि स्पष्ट रूप से अंकित हो।

निधीयन पद्धति

राष्ट्रीय न्यास समर्थ केन्द्र का निधीयन निम्नलिखित तीन शीर्षों के अंतर्गत करेगाः

I.स्थापना लागत

यह समर्थ केन्द्र की स्थापना के लिए पंजीकृत संस्था को आरंभ में केवल एक बार प्रदान की जानेवाली गैर-आवर्ती प्रकृति की लागत-राशि है। पंजीकृत संस्था मूलभूत ढाँचे में सुधार के उद्देश्य से राष्ट्रीय न्यास से अनुदान के साथ-साथ अन्य स्रोतों से भी अनुदान का इंतजाम करने के लिए स्वतंत्र है। स्थापना के लिए अपनी इच्छित जगह से सामग्री की खरीद, उसकी गुणवत्ता और मात्रा का निर्णय करना पंजीकृत संस्थाओं का विशेषाधिकार होगा।

निर्वाह लागत

राष्ट्रीय न्यास द्वारा समर्थ केन्द्र को स्थापना अवधि के बाद अधिकतम 3 महीने तक निर्वाह लागत प्रदान की जाएगी। इसका प्रावधान इस तथ्य के मद्देनजर किया गया है कि पंजीकृत संस्था को पहले महीने में 30 दिव्यांगों का नामांकन करने में कठिनाई होगी। निर्वाह लागत यह सुनिश्चित करने के लिए दी जाएगी कि केन्द्र के परिचालन के पहले दिन से ही समस्त स्टाफ और सुविधाएं उपलब्ध और कार्यशील हों, चाहे नामांकित दिव्यांगों की संख्या कितनी भी हो। निर्वाह लागत प्रदान करने का लाभ यह है कि पंजीकृत संस्था बिना किसी कठिनाई के केन्द्र को चला पाएगी। साथ ही, हमारा यह विश्वास है कि संस्था निर्वाह अवधि में स्थिरता प्राप्त कर सकेगी।

निर्वाह के लिए योग्यता मापदंड

राष्ट्रीय न्यास केन्द्र को निर्वाह लागत तभी प्रदान करेगा, जब समर्थ केन्द्र में प्रारंभिक 3 महीनों में दिव्यांगों की न्यूनतम संख्या प्रत्येक माह में अपेक्षित बैच आकार का कम से कम 20 (इस मामले में 6) हो। केन्द्र तभी परिचालन में आ सकता है, जब कम से कम 6 दिव्यांग नामांकित हों।

निर्वाह की गणना

निर्वाह लागत की गणना 3 माह की अवधि में केन्द्र में दिव्यांगों की कुल अपेक्षित संख्या तथा दिव्यांगों की वास्तविक संख्या के अंतर के आधार पर यथानुपात आधार पर की जाएगी।

उदाहरण के लिए यदि पंजीकृत संस्था में परिचालन के पहले माह में 6 दिव्यांग है तो 30-6 =24 दिव्यांगों के लिए निर्वाह लागत का भुगतान किया जाएगा। किन्तु पहले से ही नामांकित 6 दिव्यांगों के लिए मासिक आवर्ती लागत का भुगतान योजना के अनुसार किया जाएगा।

निर्वाह की वैधता

निर्वाह लागत प्रदान किए जाने की शर्त यह है कि समर्थ केन्द्र का परिचालन समय पर आरम्भ हो। समर्थ केन्द्र से अपेक्षित है कि वह स्थापना लागत जारी किए जाने के 1 माह के भीतर परिचालन आरम्भ करे। यदि परिचालन आरम्भ होने में इस समय-सीमा से एक माह से अधिक का विलंब होता है (यानी स्थापना लागत के जारी किए जाने के 2 माह के भीतर परिचालन आरंभ नहीं होता हैं ) तो जिस अवधि के लिए निर्वाह व्यय प्रदान किया जाना है, उस समग्र अवधि में से विलंब की अवधि कम कर दी जाएगी।

उदाहरण के लिए यदि समर्थ केन्द्र स्थापना लागत प्रदान किए जाने के तीन महीने बाद परिचालन आरंभ करता है तो निर्वाह लागत केवल 2 महीने के लिए प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार, यदि समर्थ केन्द्र स्थापना लागत प्रदान किए जाने के चार महीने बाद परिचालन आरंभ करता है तो निर्वाह लागत केवल 1 महीने के लिए प्रदान की जाएगी।

यदि समर्थ केन्द्र परिचालन आरम्भ होने के एक वर्ष के भीतर बन्द कर दिया जाता है तो सम्बन्धित पंजीकृत संस्था को समर्थ केन्द्र के लिए जो निर्वाह राशि दी गई है, वह उस पंजीकृत संस्था से वापस ले ली जाएगी।

III.मासिक आवर्ती लागत

राष्ट्रीय न्यास समर्थ केन्द्रों के परिचालन के पहले महीने से ही निधीयन के पात्र उसके सभी दिव्यांगजनों की मासिक आवर्ती लागत का भुगतान करेगा। राष्ट्रीय न्यास किसी केन्द्र का निधीयन तभी करेगा, जब महीने के दौरान समर्थ केन्द्र में दिव्यांग व्यक्तियों की संख्या अपेक्षित बैच आकार की न्यूनतम 30: (यानी इस मामले में 9 व्यक्ति) हो।

राष्ट्रीय न्यास दिव्यांगों का निधीयन निम्नलिखित शर्तों पर करेगाः

क. राष्ट्रीय न्यास समर्थ केन्द्र के दिव्यांगों का निधीयन 1:1 के अनुपात में करेगा, बशर्ते वहाँ एलआईजी (बीपीएल सहित) और एलआईजी से ऊपर के दिव्यांग बराबर संख्या में हों। एलआईजी की परिभाषा इस प्रकार होगीः

एलआईजी = राज्य द्वारा निर्धारित बीपीएल सीमा़ + उस राज्य की बीपीएल सीमा से 50% अधिक

ख. यदि एलआईजी (बीपीएल सहित) दिव्यांगजनों की संख्या एलआईजी से ऊपर वाले दिव्यांगजनों से अधिक है तो केवल उन एलआईजी दिव्यांगों के लिए निधि प्रदान की जाएगी, जिनके संबंध में 1:1 का अनुपात कायम रखा गया हो (एलआईजी व बीपीएल : एलआईजी से ऊपर की श्रेणी)। इस परिस्थिति में निधीयन के लिए बीपीएल को वरीयता दी जाएगी।

ग. यदि एलआईजी (बीपीएल सहित) की संख्या एलआईजी से ऊपर वाले दिव्यांगजनों से कम है तो राष्ट्रीय न्यास एलआईजी की पूरी संख्या (बीपीएल सहित) का निधीयन करेगा।

घ. इसके अलावा, राष्ट्रीय न्यास समर्थ केन्द्र के 100% बीपीएल का निधीयन योजना के अनुसार करेगा, चाहे अनुपात जो भी हो। किन्तु एलआईजी के विषय में यह शर्त लागू नहीं होगी।

राष्ट्रीय न्यास द्वारा निधीयन का उदाहरण

कुल संख्या एलआईजी की संख्या (बीपीएल सहित) एलआईजी से ऊपर की संख्या राष्ट्रीय न्यास द्वारा निधिकृत दिव्यांगों की संख्या
30 15 15 15
30 20 10 10
30 10 20 10
30 20 (16 बीपीएल 4 एलआईजी) 10 16
30 20 (8 बीपीएल 12 एलआईजी) 10 10

कार्य-केन्द्र की स्थापना लागत (यदि पंजीकृत संस्था ने ली हो)

राष्ट्रीय न्यास प्रस्ताव की व्यवहार्यता के सत्यापन के पश्चात मौजूदा पंजीकृत संस्थाओं द्वारा खोले गए कार्य-केन्द्रों की स्थापना लागत के निधीयन पर भी विचार करेगा। स्थापना व्यय प्राप्त करने के लिए मौजूदा पंजीकृत संस्था के इन कार्य-केन्द्रों में काम करने के लिए कम से कम 10 प्रशिक्षित दिव्यांगजनों का होना जरूरी है।

यदि कार्य-केन्द्र परिचालन आरंभ होने के एक वर्ष के भीतर बंद कर दिया जाता है तो राष्ट्रीय न्यास संबंधित पंजीकृत संस्था से कार्य-केन्द्र की स्थापना लागत वापस ले लेगा।

उपर्युक्त प्रत्येक शीर्ष के अंतर्गत आवंटित निधि निम्नवत हैः

क्रम सं. निधीयन शीर्ष राशि (भारतीय रुपये में) निधि संवितरण की आवृत्ति
1 स्थापना लागत (गतिविधि कक्ष , मनोरंजन कक्ष , चिकित्सा कक्ष, कंप्यूटर, फर्नीचर, स्कैनर और इंटरनेट कनेक्शन की संस्थापना) 2,90,000 /- एक बार
2 निर्वाह लागत 7,000 /- प्रतिपूर्ति प्रति अतिरिक्त दिव्यांग प्रति माह =समर्थ केन्द्र में अपेक्षित अधिकतम दिव्यांगजन (30) उस महीने के दौरान समर्थ केन्द्र में वास्तविक दिव्यांगजन स्पष्ट किया जाता है कि प्रारंभिक महीनों में पंजीकृत संस्था द्वारा नामांकित दिव्यांगों की न्यूनतम संख्या 6 से कम नहीं होगी। मासिक, प्रारंभिक 3 महीनों के लिए
3. मासिक आवर्ती लागत 7,000 /- प्रति दिव्यांगजन प्रति माह मासिक
4. कार्य-केन्द्र हेतु स्थापना लागत (यदि पंजीकृत संस्था ने लिया हो) 25,000 /-से 1,00,000 /- के बीच मामले के आधार पर

 

अंतिम नवीनीकृत: 05-07-2021

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