राष्ट्रीय न्यास

राष्ट्रीय न्यास स्वपरायणता, प्रमस्तिष्कघात, मानसिक मंदता और बहु-विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के कल्याण के लिए

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एक नज़र में हमारी योजनाएं

I. दिशा (बाल्य–कालिक हस्तक्षेप और स्कूल तैयारी योजना)

यह राष्ट्रीय न्यास अधिनियम में समाहित चार प्रकार की विकलांगताओं से युक्त 0-10 वर्ष के आयु-समूह वाले बच्चों के लिए बाल्य-कालिक हस्तक्षेप और स्कूल-तैयारी की योजना है। इस योजना का लक्ष्य दिशा केन्द्र स्थापित करना है, ताकि राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत समाहित 0-10 वर्ष के आयु समूह वाले व्यक्तियों के लिए बाल्य-काल में ही चिकित्सा, प्रशिक्षण और उनके परिवार के सदस्यों के लिए सहायता प्रदायगी के जरिए शीघ्र हस्तक्षेप उपलब्ध कराया जा सके। पंजीकृत संस्था द्वारा दिन में कम से कम 4 घंटे (प्रातः 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच) विकलांगजनों की देखभाल सुविधा प्रदान करनी चाहिए, जिसमें आयु-विशिष्ट गतिविधियाँ शामिल हों। केन्द्र में विकलांगों के लिए विशेष शिक्षक अथवा शीघ्र हस्तक्षेप चिकित्सक, फीजियोथेरेपिस्ट अथवा व्यावसायिक चिकित्सक और परामर्शदाता तथा सेवाप्रदाता और आया की व्यवस्था होनी चाहिए।

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II. विकास (दिन मे देखभाल)

यह दिन में देख-भाल की योजना है, जिसका उद्देश्य दस वर्ष या उससे अधिक आयु के विकलांगजनों में अंतर-वैयक्तिक एवं रोजगारपरक कौशल की वृद्धि के लिए अवसरों का विस्तार करना है। विकलांग व्यक्ति के विकास केन्द्र में रहने के दौरान केन्द्र द्वारा उस व्यक्ति की देख-भाल में सहायता भी प्रदान की जाएगी। साथ ही, केन्द्र राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत समाहित विकलांग व्यक्ति के परिवार के सदस्यों की सहायता करने में भी मदद करता है, ताकि दिन में अपने अन्य दायित्वों को पूरा करने के लिए उनको कुछ समय मिल सके। पंजीकृत संस्था द्वारा विकलांगों को दिन में कम से कम 6 घंटे (पूर्वाह्न 8 से अपराह्न 6 बजे के बीच) देख-भाल की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए, जिसमें आयु-विशिष्ट गतिविधियाँ भी शामिल हों। केन्द्र महीने के कम से कम 21 दिन खुलना चाहिए।

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III. समर्थ (राहतकारी देखभाल)

समर्थ योजना का उद्देश्य अनाथों अथवा लावारिसों, संकटग्रस्त परिवारों और बीपीएल तथा एलआईजी परिवारों से आनेवाले विकलांगजनों और ऐसे निराश्रितों को राहतकारी देख-भाल उपलब्ध कराना है, जो राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत शामिल चार विकलांगताओं में से कम से कम एक से ग्रस्त हैं। इसके अलावा समर्थ योजना का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों के लिए ऐसे अवसर पैदा करना है जिससे वे अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए समय पा सकें। इस योजना का उद्देश्य ऐसे समर्थ केन्द्रों की स्थापना करना है, जिन केन्द्रों में सभी आयु समूहों के लिए ऐसी सामूहिक गृह सेवा प्रदान की जानी चाहिए, जिसमें देख-भाल की पर्याप्त एवं उत्तम सेवाओं से युक्त स्वीकार्य जीवन-स्तर की सुविधाओं के साथ-साथ प्रोफेशनल डॉक्टर की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध हो।

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IV. घरौंदा (वयस्कों के लिए समूहिक गृह)

घरौंदा योजना का उद्देश्य स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु – निःशक्तताग्रस्त व्यक्तियों को आजीवन आवास की सुविधा के साथ देख-भाल की पर्याप्त एवं उत्तम सेवाओं से युक्त स्वीकार्य जीवन-स्तर की सुविधाओं के साथ-साथ प्रोफेशनल डॉक्टर की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध कराना है। घरौंदा केन्द्र को रोजगारपरक गतिविधियों, रोजगार-पूर्व गतिविधियों तथा आगे के प्रशिक्षण के लिए सहायता का प्रावधान करना चाहिए।

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V. निरामय (स्वास्थ्य बीमा योजना)

इस योजना का उद्देश्य स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु – निःशक्तताग्रस्त व्यक्तियों को किफायती कीमत पर स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत ओपीडी चार्ट में निर्दिष्ट दवाओं, पैथोलॉजी, नैदानिक परीक्षण सहित गैर-विकलांगों के लिए नियमित चिकित्सा जांच, दंत निवारक चिकित्सा, उत्तेजनात्मक विकलांगता को रोकने के लिए सर्जरी, गैर-सर्जिकल/अस्पताल में भर्ती, मौजूदा विकलांगता के लिए सुधारात्मक सर्जरी, जन्मजात विकलांगता, वर्तमान में जारी चिकित्सा, विकलांगता और विकलांगता संबंधी जटिलताओं के प्रभाव को कम करने के लिए, वैकल्पिक चिकित्सा और परिवहन लागत के लिए सभी नामांकित लाभार्थियों को 1.0 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा।

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VI. सहयोगी (देखभाल कर्ता प्रशिक्षण योजना)

इस योजना का लक्ष्य प्रशिक्षण प्रदान करने और सेवाप्रदाताओं की कुशल जन-शक्ति निर्मित करने के लिए सेवाप्रदाता कक्ष स्थापित करना है, ताकि विकलांगता युक्त व्यक्तियों को और उनके जरूरतमंद परिवारों को पर्याप्त एवं पोषणकारक देखभाल प्रदान की जा सके। साथ ही, इसका उद्देश्य माता-पिता को ऐसा अवसर प्रदान करना भी है कि यदि वे चाहें तो उन्हें देखभाल करने का प्रशिक्षण दिया जा सके। इस योजना में दो स्तर के पाठ्यक्रमों “प्राथमिक और उन्नत” के जरिए प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध होगा, ताकि इससे विकलांगता-युक्त व्यक्तियों तथा विकलांग जनों की जरूरतों की पूर्ति करने वाली संस्थाओं (एनजीओ, कार्यकेन्द्र आदि), दोनों के लिए देखभाल-कर्ता तैयार किए जा सकें।

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VII. ज्ञान प्रभा (शैक्षणिक सहयोग)

ज्ञान प्रभा योजना का उद्देश्य ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मंद बुद्धि और एकाधिक विकलांगताओं से ग्रस्त व्यक्तियों को शैक्षिक पाठ्यक्रम जैसे स्नातक पाठ्यक्रम, व्यवसायिक पाठ्यक्रम और रोजगारपरक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि उन्हें रोजगार मिल सके अथवा वे स्वरोजगार कर सकें। राष्ट्रीय न्यास द्वारा विकलांग जन को प्रति पाठ्यक्रम एक विशेष राशि प्रदान कि जाएगी। इसमें सामान्यतः फीस, परिवहन, किताबें, जेबखर्च आदि शामिल होगा।

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VIII. प्रेरणा (विपणन सहयोग)

प्रेरणा राष्ट्रीय न्यास की विपणन योजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत समाहित विकलांग व्यक्तियों द्वारा निर्मित उत्पादों व सेवाओं की बिक्री के लिए व्यवहार्य एवं व्यापक माध्यमों का विकास करना है। इस योजना का लक्ष्य विकलांग जनों द्वारा निर्मित उत्पादों को बेचने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों जैसे- प्रदर्शनियों, मेलों आदि में प्रतिभागिता हेतु धन-राशि प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत विकलांग जनों द्वारा निर्मित उत्पादों की बिक्री-राशि के आधार पर पंजीकृत संस्थान को प्रोत्साहन-राशि भी प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय न्यास द्वारा पंजीकृत संस्था को धन-राशि प्रदान की जाएगी, जिससे वें राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर के मेलों और प्रदर्शनियों आदि में प्रतिभागिता कर सकें और विकलांगजनों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों व सेवाओं का विपणन व विक्रय कर सकें। किन्तु इन कार्य-केन्द्रों में कार्य करने वाले विकलांगजनों में कम से कम 51% कर्मचारी ऐसे होने चाहिए, जो राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत समाहित हों।

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IX. संभव (सहायक सामग्री और सहायता उपकरण)

संभव योजना के अंतर्गत देश के प्रत्येक ऐसे नगर में अतिरिक्त संसाधन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी, जिनकी जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 50 लाख से अधिक हो। इन केन्द्रों में सहायक सामग्री व सहायता-उपकरणों, सॉफ्टवेयर एवं अन्य सामग्री को समन्वित और संकलित किया जाएगा और उनको प्रदर्शित करने तथा चलाकर दिखाने का प्रावधान होगा। राष्ट्रीय न्यास की वेबसाइट पर इन संभव केन्द्रों में उपलब्ध सहायक सामग्री व सहायता-उपकरणों से संबंधित सूचना रखने का प्रावधान भी शामिल है। इन केन्द्रों का लक्ष्य राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के विकलांगजनों की बेहतरी और सशक्तीकरण के लिए उपकरणों, साधनों, सहायक वस्तुओं, सॉफ्टवेयर आदि के बारे में सूचना प्रदान करना और उन तक पहुँच को सुगम बनाना है। इसके साथ ही, संबंधित हितधारकों को उक्त उपकरणों को दिखाने तथा उनके काम का प्रदर्शन करने का प्रावधान भी उपलब्ध होगा।

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X. बढ़ते कदम (जागरूकता एवं समुदाय से मेलजोल)

यह योजना राष्ट्रीय न्यास की पंजीकृत संस्था को ऐसी गतिविधियों का संचालन करने में मदद करेगी, जो राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत आने वाली विकलांगताओं के बारे में जागरूकता फैलाती हैं। इसके अलावा बढ़ते कदम योजना का लक्ष्य विकलांगजनों के प्रति समुदाय को जागरूक करना, उनमें चेतना लाना तथा उन्हें समाज में एकीकृत करके समाज की मुख्य धारा में लाना है। राष्ट्रीय न्यास प्रत्येक पंजीकृत संस्था के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 4 कार्यक्रम प्रायोजित करेगा। प्रत्येक पंजीकृत संस्था को हर वर्ष (समुदाय, शैक्षिक संस्थानों अथवा चिकित्सा संस्थानों के लिए) कम से कम 1 कार्यक्रम अवश्य आयोजित करना चाहिए।

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अंतिम नवीनीकृत: 05-07-2021

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