राष्ट्रीय न्यास

राष्ट्रीय न्यास स्वपरायणता, प्रमस्तिष्कघात, मानसिक मंदता और बहु-विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के कल्याण के लिए

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मंत्रालय से संदेश

श्री थावरचंद गेहलोत

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री, भारत सरकार

यह बड़े हर्ष का विषय है कि राष्ट्रीय न्यास ने अपने सारे कार्यक्रमों एवं योजनाओं को ‘‘डिजिटल इंडिया’’ अभियान के अंतर्गत आॅनलाइन माध्यम से संचालित किया है। राष्ट्रीय न्यास सामाजिक न्याय एवं आधिकारित मंत्रालय भारत सरकार के अधीन गठित एक निकाय है जो स्वपरायणता, प्रमष्तिष्कीय पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों के कल्याणार्थ कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय न्यास, दिव्यांगजनों एवं उनके परिवारों की क्षमता का विकास करने, उनके अधिकार उनको दिलाने तथा उनके लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने तथा समावेषी समाज बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय न्यास द्वारा विकासात्मक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को विभिन्न संषोधित एवं उन्नयन आवश्यक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं द्वारा सशक्त बनाने हेतु प्रयास करना अत्यंत सराहनीय है । यह दिव्यांगजनों को व्यापक समर्थन प्रणाली द्वारा सामान अवसर प्रदान करेगा जो अन्य संस्थाओं के सहयोग से भी किया जा सकेगा। राष्ट्रीय न्यास की वेबसाइट सिर्फ राष्ट्रीय न्यास की पंजीकृत संस्थाओं, दिव्यांगजनों तथा दिव्यांगजनों के अभिभावकों के लिए ही उपयोगी नहीं है अपितु यह अन्य स्टेक होल्डर्स के लिए भी जो दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण और समाज में समाकलन के लिए कार्य कर रहे हैं उनके लिए भी बहुत उपयोगी है। मुझे यह विश्वास है कि राष्ट्रीय न्यास का यह प्रयास दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायता प्रदान करेगा एवं दिव्यांगजनों, उनके परिवारों का ससम्मान, समान अधिकार एवं समान अवसर के साथ स्वतंत्र रूप से जीवनयापन को सुनिष्चित करेगा।

श्री कृष्ण पाल गुर्जर

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री

राष्ट्रीय न्यास, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक निकाय के रूप में, स्वपरायण, प्रमष्तिष्कीय पक्षाघात, मानसिक मंदता तथा बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों को पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से विभिन्न कल्याणकारी योजनायें प्रदान कर, उनकी क्षमता निर्माण करके प्रशिक्षण एवं देखभाल एवं देखरेख के द्वारा उनके सामाजिक- आर्थिक स्तर में सुधार हेतु कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय न्यास एक ऐसा समावेषी समाज है जो मानव विविधता और दिव्यांगजनों को स्वतंत्र रूप से ससम्मान समान अधिकार एवं समान अवसर के साथ जीवनयापन के लिए पूर्ण भागीदारिता हेतु सक्षम एवं सषक्त बनाने को महत्व देता है। राष्ट्रीय न्यास दिव्यांगजनों एवं उनके परिवारों की क्षमता विकास हेतु, उनके अधिकारों हेतु सुविधाजनक एवं अनुकूल वातावरण तैयार करने हेतु अवसर प्रदान करने तथा एक समावेषी समाज बनाने की दिषा में कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय न्यास विकलांगता के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र के लिए कार्य करता है और हम विभिन्न स्टेक होल्डर्स की राष्ट्रीय न्यास के साथ मानसिक विकलांगता के क्षेत्र में कार्य करने की सराहना करते हैं।

श्री विजय सांपला

राज्य मंत्री , सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय

मुझे यह जानकर अपार हर्ष हो रहा है कि राष्ट्रीय न्यास, माननीय प्रधानमंत्री जी के डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत अपनी वेबसाइट, योजना प्रबन्धन प्रणाली, वेब एप्लीकेषन (अनुप्रयोगक) एवं मोबाइल एप्लीकेषन को उन्नयन करने जा रहा है। राष्ट्रीय न्यास सामाजिक न्याय एवं आधिकारित मंत्रालय भारत सरकार के ‘‘राष्ट्रीय न्यास, स्वपरायण, प्रमष्तिष्कीय पक्षाघात, मानसिक मंदता एवं बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए अधिनियम (एक्ट 44- 1999)’’ के अधीन गठित एक निकाय है। संगठन के ठोस आधार के निर्माण के लिए किया गया कठिन परिश्रम राष्ट्रीय न्यास के कार्यक्रमों एवं दूरगामी योजनाओं में स्पष्ट रूप से प्रदर्षित होता है। इतने वर्षों की अवधि में राष्ट्रीय न्यास ने बड़ी संख्या में कल्याणकारी योजनाओं को लागू करके एक अनुकरणीय कार्य किया है। राष्ट्रीय न्यास के समस्त भावी प्रयासों के लिए बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

श्री रामदास अठावले

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री

राष्ट्रीय न्यास, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अंतर्गत गठित एक स्वायत्य निकाय है जो स्वपरायण, प्रमष्तिष्कीय पक्षाघात, मानसिक मंदता एवं बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। अक्टूबर 2015 में आरम्भ की गयी 10 मई / संशोधित योजनाओं को इसकी पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसने नवीन वेबसाइट एवं अपनी योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु उत्कृष्ट योजना प्रबन्धन प्रणाली का शुभारंभ किया है। मैं, योजनाओं के क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए राष्ट्रीय न्यास के प्रयासों की प्रशंसा करता हूं तथा इनके सभी प्रयासों में सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

डॉ कमलेश कुमार पांडेय

राष्ट्रीय न्यास बोर्ड के अध्यक्ष

राष्ट्रीय न्यास के कार्यकारिणी के अध्यक्ष के रूप में दिनांक -01 सितम्बर 2016 को कार्यभार ग्रहण करने से मुझे अपार प्रसन्नता हुई। मुझे यह जानकर अपार हर्ष हो रहा है कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय न्यास, जो स्वपरायण, प्रमष्तिष्कीय पक्षाघात, मानसिक मंदता एवं बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए कार्य कर रहा है, ने अपनी नवीन वेबसाइट एवं 10 नवीन योजनाओं की शुरुआत की है तथा इसने डिजिटल इंडिया अभियान के एक भाग के रूप में अपनी सभी योजनाओं एवं क्रियाकलापों को आनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया है । इस आनलाइन योजना प्रबन्धन प्रणाली ने राष्ट्रीय न्यास की कार्यशैली को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया है। मुझे आशा है कि यह समस्त योजनायें राष्ट्रीय न्यास के अंतर्गत आने वाली चारों प्रकार की दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के जीवन गुणवत्ता के सुधार में अधिक प्रभावषाली भूमिका का निर्वहन करेंगी। मैं सभी न्यासी सदस्यों से यह निवेदन करूँगा कि राष्ट्रीय न्यास के उद्देश्यों को प्राप्त करने में वे मेरा सहयोग करें। मैं अपनी समस्त पंजीकृत संस्थाओं से यह निवेदन करूँगा कि वह हमारे हाथ से हाथ मिलाकर इन 4 प्रकार की दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को राष्ट्रीय न्यास की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।

श्री मुकेश जैन

संयुक्त सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी

मैं आप सभी का स्वागत करता हूं एवं हमारी वेबसाइट प्रयोग करने के लिए आपको धन्यवाद् ज्ञापित करता हूं। राष्ट्रीय न्यास की स्थापना दो प्राथमिक कर्तव्यों ‘‘विधिक एवं कल्याणार्थ’’ के निर्वहन के लिए की गयी है। वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन स्थानीय स्तरीय समिति (एल0एल0सी0) द्वारा कानूनी संरक्षता प्रदान कर किया जा रहा है एवं कल्याणार्थ कर्तव्यों का निर्वहन कल्याणकारी योजनाओं द्वारा किया जा रहा है। हमारे पास 550 से अधिक पंजीकृत संस्थाओं एवं जनपदीय स्तर पर 628 स्थानीय स्तर समितियों का नेटवर्क है। एक प्रभावी मूल्यांकन से ज्ञात हुआ कि पूर्व में संचालित योजनायें प्रभावी कार्य नहीं कर पा रही थीं । पुरानी योजनाओं में सुधार, नई योजनाओं को तैयार करना एवं वित्तपोशण के स्वरूप में भी बदलाव की आवश्यकता थी। पंजीकृत संस्थायें हमारी योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक नहीं थे। राष्ट्रीय न्यास औसतन रू0 4.31 करोड़ प्रतिवर्ष अपनी योजनाओं पर खर्च कर सकता था जो अपर्याप्त था। अब राष्ट्रीय न्यास लगभग 45 करोड़ रू0 प्रतिवर्ष अपनी योजनाओं पर खर्च करेगा। हमने विभिन्न स्टेक होल्डर्स के साथ व्यापक चर्चा करके 10 नवीन योजनाओं को विकसित किया है। हमने दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, मुम्बई, बैंगलोर तथा लखनऊ में 6 क्षेत्रीय कार्यषालायें आयोजित कीं, प्रश्नावली के माध्यम से फीडबैक प्राप्त किया, योजना केन्द्रों एवं पंजीकृत संस्थाओं का भ्रमण किया, कार्यकारिणी में 4 बार चर्चा की और आम सभा की वार्षिक बैठक में प्रस्तुतीकरण दिया। इस प्रकार के बृहद परामर्ष के द्वारा इन योजनाओं को समावेषी, व्यवहारिक तथा प्रयोजनवादी बनाया गया है। ‘‘डिजिटल इंडिया’’ के एक भाग के रूप में आनलाइन योजना प्रबन्धन प्रणाली राष्ट्रीय न्यास की कार्यशैली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने जा रही है। मुझे आशा है कि यह योजनायें स्वपरायण, प्रमष्तिष्कीय पक्षाघात, मानसिक मंदता एवं बहुदिव्यांगता वाले दिव्यांगजनों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में एक मील का पत्थर सिद्ध होंगीं। मैं समस्त पंजीकृत संस्थाओं से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह करता हूं। 

[ड्राफ्ट स्टेज]

अंतिम नवीनीकृत: 04-12-2017

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